अनवांटेड 72
कवि: अंकिता रासुरी
‘अनवांटेड 72’ प्रेम के नाम पर रात दिन सड़ती-गलती मेरी ज़िंदगी मेरा शरीर ख़तरनाक स्थिति तक टूटता रहा कंपनियाँ कभी नहीं कहतीं कि यह दवा नहीं एक धीमा ज़हर है
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

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कवि: अंकिता रासुरी
‘अनवांटेड 72’ प्रेम के नाम पर रात दिन सड़ती-गलती मेरी ज़िंदगी मेरा शरीर ख़तरनाक स्थिति तक टूटता रहा कंपनियाँ कभी नहीं कहतीं कि यह दवा नहीं एक धीमा ज़हर है