मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करेंTEST - कविताबोल का अगला Open Mic Event 26 अगस्त को होने जा रहा है। इसमें भाग लेने के लिए अथवा ज़्यादा जानकारी के लिए हमारे आयोजन पेज पर जाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें1/2

शहर में सूर्यास्त

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

← किताबों पर लौटें
फटी हथेलियाँ

किताब · Hindi

फटी हथेलियाँ

लेखक: नेहा नरुका

राजकमल प्रकाशन - 2024

नेहा नरुका का कविता-संग्रह 'फटी हथेलियाँ' श्रम, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का एक सघन दस्तावेज़ है। 'अकाल' और 'जवान लड़की की लाश' जैसी कविताओं के माध्यम से यह संग्रह समकालीन जीवन की कठोर सच्चाइयों, सामाजिक विषमताओं और स्त्री-अनुभूतियों को अत्यंत संजीदगी से स्वर देता है। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह कृति अपनी गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेगात्मक तीव्रता के लिए उल्लेखनीय है।

कुछ खरीद लिंक संबद्ध लिंक हो सकते हैं। पाठक के लिए किताब की कीमत बदले बिना ये कविताबोल को सहयोग देते हैं।

इस किताब की कविताएँ

फटी हथेलियाँ से पढ़ें

अकाल

कवि: नेहा नरुका

जिसने अकाल देखा हो वह थोड़ा-सा गेहूँ हमेशा बचाकर रखता है बेशक, उस गेहूँ में घुन लग गया हो, पर फिर भी अकाल देख चुका व्यक्ति उस गेहूँ को फेंकता नहीं वह अपना ज़रूरी समय घुन बीनने में गँवाता है वह इन्तज़ार करता है खिलकर आई ध...

जवान लड़की की लाश

कवि: नेहा नरुका

बच्चे खेल रहे थे, उन्हें लगा यह भी कोई नया खेल है वे भी भागने लगे भागते भागते मर्द आगे निकल गए बच्चे पीछे रह गए