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शहर में सूर्यास्त

सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

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परिचय

नेहा नरुका

1987–Bhind, Madhya Pradesh, India

नेहा नरुका समकालीन हिंदी साहित्य की कवि और लेखिका हैं। 'फटी हथेलियाँ' उनका प्रमुख काव्य-संग्रह है तथा 'अकाल' और 'जवान लड़की की लाश' उनकी प्रमुख बहुचर्चित रचनाएँ हैं।

कविताएँ

नेहा नरुका की कविताएँ

अकाल

कवि: नेहा नरुका

जिसने अकाल देखा हो वह थोड़ा-सा गेहूँ हमेशा बचाकर रखता है बेशक, उस गेहूँ में घुन लग गया हो, पर फिर भी अकाल देख चुका व्यक्ति उस गेहूँ को फेंकता नहीं वह अपना ज़रूरी समय घुन बीनने में गँवाता है वह इन्तज़ार करता है खिलकर आई ध...

जवान लड़की की लाश

कवि: नेहा नरुका

बच्चे खेल रहे थे, उन्हें लगा यह भी कोई नया खेल है वे भी भागने लगे भागते भागते मर्द आगे निकल गए बच्चे पीछे रह गए

किताबें

नेहा नरुका की किताबें

फटी हथेलियाँ

फटी हथेलियाँ

लेखक: नेहा नरुका

राजकमल प्रकाशन - 2024 - हिन्दी

नेहा नरुका का कविता-संग्रह 'फटी हथेलियाँ' श्रम, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं का एक सघन दस्तावेज़ है। 'अकाल' और 'जवान लड़की की लाश' जैसी कविताओं के माध्यम से यह संग्रह समकालीन जीवन की कठोर सच्चाइयों, सामाजिक विषमताओं और स्त्री-अनुभूतियों को अत्यंत संजीदगी से स्वर देता है। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह कृति अपनी गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेगात्मक तीव्रता के लिए उल्लेखनीय है।