तुम्हें आपत्ति है
कवि: निर्मला पुतुल
तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
निर्मला पुतुल समकालीन हिंदी साहित्य की एक प्रमुख आदिवासी कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनकी कविताएँ जल-जंगल-ज़मीन, संताल समुदाय की जीवन-स्थितियों और स्त्री-विमर्श के प्रामाणिक प्रश्नों को प्रखरता से उठाती हैं।
कविताएँ
कवि: निर्मला पुतुल
तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा
किताबें
इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।