बर्बरता की ढाल ठाकरे
कवि: नागार्जुन
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! कैसे फ़ासिस्टी प्रभुओं की -- गला रहा है दाल ठाकरे ! अबे सँभल जा, वो पहुँचा बाल ठाकरे !
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
जनकवि नागार्जुन (वास्तविक नाम: वैद्यनाथ मिश्र) प्रगतिशील काव्यधारा के मूर्धन्य कवि, उपन्यासकार और गद्यकार हैं। उन्होंने हिंदी और मैथिली (यात्री उपनाम से) में युगीन यथार्थ, जन-आकांक्षाओं और राजनीतिक विद्रूपताओं पर अत्यंत प्रखर, तीखी और व्यंग्यात्मक कविताएँ लिखीं। लोक-जीवन से गहरा जुड़ाव उनकी कविताओं की मुख्य विशेषता है।
कविताएँ
कवि: नागार्जुन
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! कैसे फ़ासिस्टी प्रभुओं की -- गला रहा है दाल ठाकरे ! अबे सँभल जा, वो पहुँचा बाल ठाकरे !
किताबें
इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।